औद्योगिक क्षेत्र बना हादसों का केंद्र : औद्योगिक विकास की भेंट चढ़ रही मासूम जानें, सड़कों पर काल बनकर दौड़ रहे भारी वाहन
Ramesh Batra
Thu, Jan 1, 2026
तिल्दा-नेवरा। क्षेत्र के चारों ओर बढ़ते औद्योगिक क्षेत्र और फैक्ट्रियों के कारण तिल्दा-नेवरा की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। विडंबना यह है कि जिस विकास को क्षेत्र की उन्नति का आधार माना जा रहा था, वही अब आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। आलम यह है कि क्षेत्र की मुख्य सड़कों और नेशनल हाईवे पर रोजाना कहीं न कहीं एक्सीडेंट की खबरें सामने आ रही हैं।
खौफनाक रफ्तार और लापरवाही का तांडव
हाल ही में हुई कुछ हृदय विदारक घटनाएं प्रशासन के दावों और यातायात व्यवस्था की पोल खोलती नजर आती हैं:
गलत दिशा से आई मौत: एनएच 30 पर भूमिया के पास एक तेज रफ्तार टाटा 407 के चालक ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। गलत दिशा (Wrong Side) से आ रहे इस वाहन ने सामने से आ रहे ट्रक को जोरदार टक्कर मार दी। गनीमत रही कि इस टक्कर में ट्रक चालक बाल-बाल बच गए, लेकिन भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि टकराने के बाद मेटाडोर अनियंत्रित होकर पलट गई।
उजड़ गया एक हंसता-खेलता परिवार: एक अन्य दुखद घटना में, जोता और टण्डवा के बीच सडक किनारे खड़े एक वाहन को बचाकर निकल रहे बाइक सवार परिवार को सामने से आ रही अज्ञात मेटाडोर ने अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण टक्कर में एक मासूम बच्चे के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया। आरोपी चालक अपनी गाड़ी लेकर मौके से फरार हो गया, जो सड़कों पर असुरक्षा के माहौल को दर्शाता है।
औद्योगिक क्षेत्र बना हादसों का केंद्र
स्थानीय लोगों का कहना है कि तिल्दा के आसपास स्थापित उद्योगों के कारण भारी वाहनों (ट्रकों, मेटाडोर और डंपरों) की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। ये चालक अक्सर समय बचाने के चक्कर में शॉर्टकट, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और ओवरस्पीडिंग का सहारा लेते हैं, जिसका खामियाजा दोपहिया वाहनों और पैदल चलने वालों को भुगतना पड़ता है।
मुख्य समस्याएं जो बन रही हैं दुर्घटना का कारण:
भारी वाहनों का अनियंत्रित प्रवेश: व्यस्त समय में भी भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही।
रॉन्ग साइड ड्राइविंग: एनएच और मुख्य मार्गों पर नियमों की धज्जियां उड़ाना।
सड़कों पर अवैध पार्किंग: खराब या खड़े वाहन अक्सर अंधेरे में काल बन जाते हैं।
पुलिस पेट्रोलिंग का अभाव: सड़कों पर मॉनिटरिंग न होने से चालक बेखौफ रहते हैं।
निष्कर्ष: तिल्दा-नेवरा की सड़कों पर बढ़ती मौतों का सिलसिला तब तक नहीं थमेगा, जब तक प्रशासन और परिवहन विभाग इन बेलगाम वाहनों पर सख्त कार्रवाई नहीं करता। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, या अब इन सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे?

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