: नैनिहलो के भविष्य से हो रहा खिलवाड़,शराबी शिक्षक पर क्यों मेहरबान है शिक्षा अधिकारी
Admin
Mon, Aug 5, 2024
कोरबा |सरकारी स्कूलों में यूं तो लाखों रुपए का बजट सरकार देती है लेकिन फिर भी सरकारी स्कूलों में दर्ज संख्या कम होते जाता है कहीं ग्रामीण इलाकों में निजी स्कूल खुलने भर की देरी होती है कि अभिभावक अपने बच्चों को लेकर प्राइवेट स्कूलों में चले जाते हैं चाहे वह किसान हो या मजदूर के बच्चे इसका सीधा कारण यह है कि स्कूलों में शिक्षा का स्तर इतना निम्न हो जाना की इस बारे में बात करना ही व्यर्थ है कई मर्तबा सोशल मीडिया के माध्यमों से भी शराबी शिक्षकों का भी वीडियो सामने आ ही जाता है।
ताजा मामला कोरबा जिला के करतला विकासखंड अंतर्गत आने वाला ग्राम पटियापाली का जहां शास.प्राथ. शाला पठियापाली का जहां दो शिक्षकों को स्कूल की जिम्मेदारी दी गई है जिसमें एक प्रधान पाठक एक सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत है जिसमें सहायक शिक्षक पवन बिंझवार अपनी शराबी हरकतों के कारण दो बार सस्पेंड हो चुके हैं। जिसकी शिकायत कई मर्तबा उच्च शिक्षा अधिकारियों से भी की जा चुकी है लेकिन कहते हैं ना कि सैया भले कोटवार तो डर काहे का इसी प्रकार सहायक शिक्षक पवन बिंझवार का हाल है वे हमेशा शराब पीकर स्कूल पहुंचते हैं और स्कूल में इच्छा अनुसार ड्यूटी कर चले जाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कई बार शिक्षक इतना शराब पीकर स्कूल आए कि वह स्कूल में ही नशे की हालत में सो गए ग्रामीणों ने यह भी बताया की इस संबंध में जब शिक्षक से शिकायत करने की बात कही तो सहायक शिक्षक पवन बिंझवार ने कहा की ब्लॉक में बैठे उच्च अधिकारी से मेरा रिश्ता मजबूत है दो बार सस्पेंड हो चुका हूं फिर भी मेरा कुछ नहीं होता जो शिकायत करनी है वह शिकायत कर लो मेरा कुछ नहीं होने वाला। यह बात सही भी है की सहायक शिक्षक दो मर्तबा सस्पेंड किया जा चुके हैं और ऐसा क्या देखने को मिलता है उच्च अधिकारियों को कि उनको बहालकर एक स्कूल से दूसरे स्कूल भेज दिया जाता है लेकिन उन पर कोई कार्रवाई चाहे खंड शिक्षा अधिकारी हो या जिला शिक्षा अधिकारी हो कोई भी जिम्मेदार अधिकारी क्यों नहीं कड़ी कार्यवाही करता यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है, इस विषय पर खंड शिक्षा अधिकारी संदीप पांडे से इस विषय पर फोन के माध्यम से संपर्क किया गया किंतु उनसे संपर्क नहीं हो पाया। ग्रामीणजन इस दुविधा में होते हैं की ऊपर के ही अधिकारी इन पर कोई कार्यवाही नहीं करते तो क्या करें, ग्राम पठियापाली के किसान मजदूर गरीब अपने बच्चों को शराबी शिक्षकों से पढ़ने को मजबूर हो जाते हैं और अपनी किस्मतों पर रोने के सिवाय और कुछ हाथ नहीं लगता।
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