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बच्चों की ज़ुबान पर चढ़ी देशभक्ति और छत्तीसगढ़िया लहजा : "गोली चली तो गोला

तिल्दा नेवरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'गोली चली तो गोला' वाला बयान अब सिर्फ राजनैतिक गलियारों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि तिल्दा नेवरा में बच्चों की ज़ुबान पर भी चढ़ गया है. दिलचस्प बात यह है कि बच्चों ने इसमें अपनी छत्तीसगढ़ी भाषा का तड़का लगाकर इसे और भी प्रभावी बना दिया है, जो उनकी देशभक्ति और क्षेत्रीय गौरव को दर्शाता है. अब बच्चे गर्व से कहते हैं – "गोली चली तो गोला नहीं छोदन रोगहा पाकिस्तान तोला!"

यह नारा बच्चों के बीच इतना लोकप्रिय हो गया है कि स्कूलों से छुट्टी के बाद या खेल के मैदानों में अक्सर उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है. प्रधानमंत्री के इस कथन में निहित कड़ा संदेश और दृढ़ संकल्प बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डाल रहा है. वे इसे देश की सुरक्षा और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के एक प्रतीक के रूप में देख रहे हैं.

वहीं, इसमें छत्तीसगढ़ी लहजे का जुड़ना इस बात का संकेत है कि स्थानीय संस्कृति और भाषा का प्रभाव बच्चों के विचारों पर कितना गहरा है. 'रोगहा' शब्द का प्रयोग यहां पाकिस्तान के प्रति घृणा और उसे कमजोर दिखाने के लिए किया गया है, जो स्थानीय भाषा के माध्यम से उनके गुस्से और राष्ट्रीय भावना को व्यक्त करता है.

बच्चों में इस तरह की देशभक्ति की भावना का बढ़ना निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है. यह दर्शाता है कि वे देश के महत्वपूर्ण मुद्दों और उसकी सुरक्षा को लेकर जागरूक हैं. साथ ही, यह भी दर्शाता है कि प्रधानमंत्री के बयानों का आम जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है.

शिक्षाविदों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि बच्चों में इस तरह की अभिव्यक्तियां उनकी बढ़ती समझ और राष्ट्रीय पहचान के प्रति उनके लगाव को दर्शाती हैं. हालांकि, उन्हें यह भी ध्यान रखना होगा कि ऐसी भावनाएं सकारात्मक दिशा में ही रहें और किसी प्रकार की घृणा या विद्वेष को बढ़ावा न दें, बल्कि देश के प्रति प्रेम और सौहार्द को ही मजबूत करें.

कुल मिलाकर, तिल्दा नेवरा में बच्चों के बीच यह नारा न केवल देशप्रेम का परिचायक बन गया है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे राष्ट्रीय मुद्दे स्थानीय भाषाओं और बोलियों के माध्यम से आम जनमानस तक पहुंच रहे हैं, और उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने का एक सशक्त मंच प्रदान कर रहे हैं

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