वार्डवासियों का फूटा गुस्सा : गरीबों के आशियानों पर बुलडोजर चला तो मचेगा बवाल, कांग्रेस ने भरी हुंकार: "प्रशासन की तानाशाही नहीं चलेगी!"
Ramesh Batra
Thu, Dec 25, 2025
तिल्दा नेवरा। विकास के नाम पर गरीबों को बेघर करने की प्रशासनिक साजिश के खिलाफ आज तिल्दा नेवरा की सड़कों पर जनाक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा। ओवरब्रिज निर्माण के विरोध में वार्डवासियों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। इस जन-आंदोलन को कांग्रेस का खुला समर्थन मिलते ही मामला पूरी तरह गरमा गया है। रायपुर जिला ग्रामीण अध्यक्ष पप्पू बंजारे और दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित लोगों ने एसडीएम कार्यालय का घेराव किया और प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी कि यदि गरीबों के हितों की अनदेखी हुई, तो ईंट से ईंट बजा दी जाएगी।
"मुआवजा नहीं, न्याय चाहिए": वार्डवासियों का फूटा गुस्सा
प्रभावित वार्डवासियों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन विकास की आड़ में उनके सिर से छत छीनने पर आमादा है। एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में उग्र स्वर में मांग की गई है कि:
• पुनर्वास पहले, तोड़फोड़ बाद में: किसी भी मकान को हाथ लगाने से पहले प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
• खैरात नहीं, सही मूल्यांकन: मकानों का बंदरबांट वाला मूल्यांकन बंद कर बाजार दर पर उचित मुआवजा दिया जाए।
• अंडरब्रिज की मांग: वर्तमान स्थल पर ओवरब्रिज थोपने के बजाय जनहित में अंडरब्रिज बनाया जाए।
• बाइपास का विकल्प: ओवरब्रिज को शहर के बीच से हटाकर बाइपास रोड पर ले जाया जाए ताकि गरीब परिवारों के आशियाने बच सकें।
दिग्गजों ने दी घेराबंदी की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने पहुंचे पूर्व पाठ्य-पुस्तक निगम अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी और पूर्व सिंधी अकादमी अध्यक्ष राम गीडलानी ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासन विकास के नाम पर विनाश का खेल बंद करे। कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया कि वे मूकदर्शक बनकर गरीबों की बर्बादी नहीं देखेंगे।
इस दौरान ग्रामीण अध्यक्ष बलदाऊ साहू, किसान कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पवन बघेल, पार्षद राजेश कोटवानी, सोनू मार्कंडेय सहित सनत सेन, पप्पू नामदेव, नानक छाबड़ा, पूर्व पार्षद सुनील सोनी, दशरथ डहरिया, अजितेश शर्मा, अमजद खान, छाया पार्षद रामेश्वर यदु, गजानंद वर्मा एवं भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
प्रशासन को अल्टीमेटम
क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस और वार्डवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह तो सिर्फ ट्रेलर है; यदि प्रशासन ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी और गरीबों के आशियानों को उजाड़ने की कोशिश की, तो उग्र आंदोलन, चक्काजाम और घेराव की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करता है या टकराव का रास्ता चुनता है।
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