BREAKING NEWS

तिल्दा-नेवरा से आखिर कहां गायब हो गए कौवे और बाभन चिड़िया?

छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ में महेंद्र साहू बने किसान विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष

व्याख्याता विमला भास्कर की राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों पहाड़ी कोरवा जनजाति के छात्रों पर लिखित पुस्तक का महामहिम राज्यपा

एक साहित्यिक बस्ती में देर तक सुनी गई ग़ज़लों की अनुगूँज

तिल्दा-नेवरा में व्यापारियों के लिए जीएसटी और इनकम टैक्स पर मार्गदर्शन शिविर आज

Advertisment

अभिभावकों में बढ़ रहा असंतोष : निजी स्कूल बनाम ड्रेस, मोजा, बेल्ट और किताब दुकान

तिल्दा नेवरा। शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों द्वारा ड्रेस, मोजा, बेल्ट, किताब और कापी को लेकर अभिभावकों पर एकतरफा दबाव बनाए जाने का मामला एक बार फिर से गरमा गया है। क्षेत्र के कई अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन छात्रों को विशेष दुकानों से ही सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जिससे उन्हें महंगे दामों पर सामान लेना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासी और अभिभावक राजेश वर्मा ने बताया, “स्कूल का कहना है कि निर्धारित दुकान से ही ड्रेस और किताबें लें, अन्यथा बच्चे को स्कूल में अनुमति नहीं मिलेगी। बाहर से खरीदी गई सामग्री को मान्यता नहीं दी जा रही।” इससे स्थानीय व्यवसायियों और पुस्तक विक्रेताओं में भी रोष व्याप्त है, क्योंकि इससे उनकी बिक्री पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

निजी दुकानें बन रही मनमानी का केंद्र

शहर के कुछ नामी स्कूलों ने विशेष ड्रेस एवं स्टडी मटेरियल की आपूर्ति के लिए एक या दो दुकानों को ठेका दे रखा है, जहां से अभिभावकों को महंगे दामों पर ड्रेस, मोजे, बेल्ट और किताबें खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। सामान्य बाजार में जहाँ यही सामग्री 30-40% कम कीमत पर उपलब्ध है, वहीं "स्कूल मान्यता" के नाम पर अभिभावकों से अधिक राशि वसूली जा रही है।

प्रशासन और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की माँग

अभिभावकों और व्यापार मंडल ने इस पूरे मामले में प्रशासन से हस्तक्षेप की माँग की है। व्यापारी संघ के अध्यक्ष सुंदरलाल पंजवानी ने कहा, “यह पूरी तरह से व्यापारिक एकाधिकार को बढ़ावा देना है। शिक्षा का व्यवसायीकरण बच्चों और अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ बनता जा रहा है।”

निष्कर्ष

इस मुद्दे ने तिल्दा नेवरा में शिक्षा व्यवस्था के व्यवसायिक रूप को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। प्रशासनिक चुप्पी और स्कूलों की मनमानी के बीच अभिभावकों की जेब पर लगातार बोझ बढ़ रहा है। यदि शीघ्र ही कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया तो विरोध और भी तेज हो सकता है।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें